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नन्ही सी बच्ची के विश्वास की शक्ति | आत्मनिर्भरता की कहानी |

                        नन्ही सी बच्ची के विश्वास की शक्ति

हेलो दोस्तों ! मेरा नाम पुजा कुमारी है और मेरा ब्लॉग AchchhiJankari4u पर आपका स्वागत है. आज के इस पोस्ट में हम एक नन्ही सी बच्ची के विश्वास की शक्ति के बारे में जानेंगे. विश्वास इन्सान के अदंर की वो शक्ति है जो एक इन्सान को महान इन्सान बना सकती है. तो आइये चलते हैं की ओर.


बच्ची की आत्मनिर्भरता

एक गांव मे एक छोटी सी बच्ची रहती थी. उसके माता - पिता उसके पैदा होते ही चल बसे अब वह इस दुनिया में बिलकुल अकेली थी. उसका अपना कोई नही था. लेकिन वह बच्ची माता दुर्गे की सच्ची पुजारिन थी. बड़ी ही श्रधा से हर रोज माँ का सेवा करती रहती और हर दिन माँ को भोग लगाने के बाद ही स्वयं भोजन करती. उस मंदिर में एक  पुजारी भी रहते थे. वो भी प्रत्येक दिन माँ की सेवा करते लेकिन उनके सेवा सत्कार और उस बच्ची के सेवा सत्कार में जमीन - आसमान का फर्क था. उस छोटी से बच्ची के दिल जरा सा भी छल - कपट नही था. मंदिर के आस पास ही खेलती और वहीँ पर सो जाती. दुसरे बच्चे उसे खेलने नही देते थे. वो बच्ची तो अपने माँ को नही देखी थी परन्तु वह दुर्गा माँ को ही अपना माँ समझती और उन्हें हर रोज कहती - "माँ तुम कहाँ हो माँ, मेरे सारे दोस्त की माँ हैं, उन सबके पास ही हमेशा रहती है फिर तुम मेरे पास क्यों नही रहती. तुम जल्दी से आ जाओ माँ मैं तुम्हारी राह देख रही हूँ." और इतना कह कर वो बच्ची रोने लगती. उस छोटी सी बच्ची को पूर्ण विश्वास था की एक दिन उसकी माँ जरुर आएगी. यही आशा लेकर वह हर रोज माँ के सामने बैठकर बातें करती और उन्हें अपने पास बुलाती. 

    एक दिन बहुत तेज़ की बारिश हो रही थी और वो बच्ची बारिश में भीग गयी जिसके कारण उसको बुखार आ गया और वह मंदिर में ही लेती रही माता रानी को भोग लगाने का समय हो गया लेकिन उसे तो तेज़ बुखार था. पुजारी आया और मंदिर की साफ - सफाई में लग गया तभी देखा की नन्ही - सी बच्ची बुखार से कांप रही है. दौड़ कर उसके पास गया और बोला - "बेटी क्या हुआ."

हाथ छूकर देखा तो पूरा शरीर आग के जैसे जल रहा था. 

पंडित बोला - "बेटी तुम्हे तो बहुत तेज़ बुखार है, चलो डॉक्टर के पास ले चलता हूँ."

पंडित उसे उठा नही पा रहा था. बच्ची को स्वयं उठने की शक्ति नही थी. एक दिन का बुखार उसे काफी कमजोर कर दिया था. और तो और रात को खाना भी नही खायी थी.

पंडित बोला - "बेटी तुम यहीं रुको मैं डॉक्टर को यहीं बुला कर लाता हूँ. 

पंडित डॉक्टर को बुलाने जाता है.

बच्ची बुखार से कराह रही होती है. तभी उसके सामने सूरज की किरणों की भांति तेज़ सा प्रकट होता है और उसका आँख बंद हो जाता है. कुछ देर के बाद एक मधुर सी आवाज उसके कानों में सुनाई पड़ता है.  "उठो बेटी! आँख खोलो! देखो मैं तुम्हारे लिए भोजन लेकर आई हूँ." बच्ची धीरे से आँख खोलती है और देखती है की उसके सामने एक शेर है और उस शेर पर बैठी हुई माँ दुर्गे उनके हाथ में एक बड़ा सा थाली में रंग - बिरंगे व्यंजन परोसे हुए हैं. वो फट से उठना चाहती है लेकिन वह उठ नही पाती और फिर से जमीन पर गिर जाती है. फिर माता रानी अपने शेर पर से उतरती हैं. मानो ऐसे जैसे गंगा माँ धरती पर उतरी हों. उनका पावों का पायल एक विशिष्ट प्रकार की ध्वनि उत्पन्न करते हुए बिलकुल शांत वातावरण में मधुर गीत के जैसे सुनाई पड़ता है. व्यंजन परोसा हुआ थाली निचे रखती हैं और अपने दोनों हाथों एक हाथ से माथा को सहारा देते हुए और दुसरे हाथ से बांह को थमते हुए उस बच्ची को उठती हैं. बच्ची आश्चर्यचकित नज़रों से देखती है. माँ अपने मधुर आवाज से बोलती हैं - "बेटी मैं तुम्हारी माँ हूँ!" बच्ची को ख़ुशी का ठिकाना नही रहता और वह झट से माँ के सिने से लिपट जाती है. "माँ तुम इतने दिन से कहाँ थी, मेरे पास क्यों नही आ रही थी, पता है मैं तुम्हे कितना याद करती हूँ." माँ मुस्कुराते हुए बोलती हैं - बेटी अब मैं आ गयी हूँ न! मेरी प्यारी सी बेटी को बहुत तेज़ भूख लगी है. अब चलो खाना खा लो. माँ भोजन का एक निवाला बच्ची को खिलाती हैं और फिर बच्ची भी एक निवाला लेकर माँ को खिलाती हैं. भोजन करने के बाद बच्ची का बुखार तो बिलकुल जादू के जैसे ठीक हो जाता है. उसके बाद उसको एक बार फिर अपने सिने से लगाती हैं और बोलती हैं "बेटी अब मैं चलती हूँ, तू अपना ध्यान रखना. मैं बीच - बीच में तेरे से मिलने आते रहूंगी. अगर मेरी याद आये तो मुझे सच्चे मन से याद करना मैं चली आउंगी." और माता रानी अंतर्धयान हो जाती हैं. उसके बाद पंडित डॉक्टर को लेकर आता है तो देखता है की वह बच्ची मंदिर के प्रांगन में खेल रही है. पंडित बच्ची से उसका हाल पूछता है तो बच्ची सारा बात बताती है. दोनों माता रानी का जयकारा लगाते हैं.

तो दोस्तों ये था आज का पोस्ट एक नन्ही सी बच्ची के विश्वास की शक्ति पर कहानी जो सभी के दिल को छू लेने वाली है. इस पोस्ट से हमे यह शिक्षा मिलती है की विश्वास में इतनी शक्ति है कि कोई इन्सान अपने उजड़ा हुआ जिंदगी भी बसा सकता है.

धन्यवाद्!


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