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ईमानदारी

                        

                                                       ईमानदारी

हेलो दोस्तों ! आज की इस पोस्ट में बात करने वाली हूँ ईमानदारी के ऊपर एक कहानी के बारे में. इस कहानी के माध्यम से हम जानेंगे की कैसे गरीबी में भी ईमानदारी को नही खोना चाहिए. तो आइये चलते हैं कहानी की ओर.

                                     

एक गावं में एक गरीब व्यक्ति रहता था, जिसका नाम सुकरा चाचा था उसका एक बीटा भी था जो अभी पढाई क्र रहा था. सुकरा चाचा बहुत मेहनती थे. जहाँ भी उन्हें काम मिलता खूब मन लगाकर काम करते थे. दीपावली आने वाली थी इसलिए सब कोई अपने - अपने घरो की सफाई में लगे थे जिससे  मजदूरो की मांग बढ़ गयी थी. सुकरा चाचा को भी एक घर में काम मिल गया था.

    जहाँ सुकरा चाचा काम कर रहे थे वहीँ बगल में एक महिला रहती थी. उसके बेटे - बहु बहार शहर में रहते थे. वे दीपावली में आने वाले थे तो उस महिला ने चाचा को मजदुर खोज कर लाने का आग्रह किया.

    सुकरा चाचा शाम को गावं वापस आए. उन्होंने अपने परिचितों से महिला के घर में काम करने को कहा, परन्तु सभी किसी - न - किसी के यहाँ काम कर रहे थे इसलिए सब मना कर दिए. सुकरा चाचा उदास हो गए. वह सोच में पड़ गए कि महिला को क्या जवाब दूंगा.

    सुकरा चाचा का बीटा रांथु वह भी काफी मेहनती था. उनके मन में एक सुझाव आया. कल रविवार है, रांथु को स्कुल में छुट्टी भी है, अपने बेटे को ही काम में लगा देना बेहतर होगा. उस महिला की बात भी रह जाएगी और घर में दो पैसे भी आ जाएँगे ? यह बात उन्होंने अपने बेटे को बताई तो वह तुरंत तैयार हो गया. स्कुल का सारा काम रात को ही खत्म कर लिया. सुबह जल्दी तैयार होकर अपने पिताजी के पास काम पर चल दिया. रांथु को उसके पिता उस महिला के घर में काम पर लगा दिया और खुद अपना काम पर चले गये.

    रंथु महिला के घर की सफाई के काम में जुट गया. उस कमरे में बेशकीमती सामान पड़े थे. वह खूब मजे में काम कर रहा था.

    मालकिन काम समझकर बहार चली गयी थी. प्रत्येक चीज को साफ़ - सुथरे से करीने में सजाकर रखते जा रहा था. काम करते - करते घंटो बीत गए. तभी उसकी नजर एक खुबसूरत घडी पर पड़ी. उसे देखा तो देखता ही रह गया. 

रंथु का परीक्षा आने वाली थी. उसके पास घडी नही थी. उसके मन में पाप जाग उठा. उसने घडी को छिपा लिया ताकि परीक्षा में काम आ जाए. परन्तु अगले ही क्षण जोर-जोर से बडबडाने लगा - "मैं कितना गिर गया हूँ. मेरी चोरी पकड़ी गयी तो मेरे पिता की प्रतिष्ठा मिट्टी में मिल जाएगी. फिर उन्हें कोई काम भी नही देगा. माँ मुझे हमेशा कहती है की ईश्वर हर जगह वास करते हैं वे सब कुछ देख सकते हैं. हम आदमी की नजरों से बच सकते हैं परन्तु उनके नजर से नही बच सकते."

    रंथु पूरी तरह कांपने लगा और घबराने लगा. उसने घडी को मेज पर रख दी. वह सोचने लगा- "मैं गरीब हूँ, पर दुसरे की चीज इस तरह छिपा कर नही ले जा सकता. चोरी करनेवाला कभी भी निर्भय होकर नही रह सकता. वह सदा आशंकित ही रहता है. इसलिए मैं प्रत्येक रविवार इसी तरह काम किया करूंगा और उसी पैसे से घडी खरीदूंगा.

    संयोग से उस घर की मालकिन ये सब दरवाजे पर खड़ी होकर देख रही थी. वह उसके पास आई और बोली - "तूने घडी क्यों नही ली ?" यह सुनकर रंथु जमीन पर बैठ गया और काँपने लगा.

    इधर रंथु की ईमानदारी से मालकिन बहुत प्रभावित हुई. वह स्नेहपूर्वक उसके सिर पर हाथ फेरते हुए बोली - " बेटा! मैं तुम्हारी सब बातें सुन चुकी हूँ. तुम गरीब जरुर हो परन्तु हो बड़े ईमानदार. तुम पर जरुर ईश्वर की कृपा होगी. एक दिन तुम बहुत बड़े आदमी बनोगे." मालकिन ने रंथु को ह्रदय से लगा लिया और अपने आँचल से उसके आंसू पोंछने लगीं. वह आगे बढ़ी और मेज पर से घडी उठाकर उसे पहनते हुए बोली - " तुम्हारी ईमानदारी का यह ईनाम है. तुम जीवन में बहुत आगे बढ़ो."

    रंथु प्रसन्न हुआ. उसने पूरे मनोयोग से अपना काम शीघ्र पूरा कर दिया. मालकिन का आशीर्वाद लेकर वह अपने घर चला गया.

    बड़ा होकर रंथु ने परिश्रम और ईमानदारी के बल पर अच्छा पद प्राप्त किया जहाँ उसे खूब ख्याति मिली. किसी ने सच कहा है - "ईमानदार बनने के लिए हिम्मत करो और मेहनत से मत डरो."


    तो दोस्तों! इस कहानी से हमे यह शिक्षा मिलती है की हमे ईमानदारी से काम करना चाहिए.

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