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शेर और पंडित की कहानी हिंदी

                        शेर और पंडित की रोचक कहानी हिंदी 


हेलो दोस्तों ! मेरा नाम पुजा कुमारी है और मेरा ब्लॉग AchchhiJankari4u पर आपका स्वागत है. तो दोस्तों आज की इस लेख से हम एक बेहद ही रोचक कहानी के बारे में जानेंगे जिससे हमे कुछ सिख मिलेगी. तो आइये चलते हैं कहानी की ओर.


शेर और पंडित की रोचक कहानी 

एक गाँव था उस गाँव के रस्ते में बहुत घना जंगल था जंगल घना होने के कारण तरह तरह के पशु-पक्षी जंगल में रहते थे. एक शेर भी रहता था. शेर कभी कभी गाँव में घुसकर काफी तहलका मचाता था. इसी वजह से गाँव वाले जंगल के रस्ते में एक पिंजड़ा रख दिए थे. रात हुई सभी अपने - अपने घरों के अन्दर हो गये गाँव शांत हो गयी. तभी शेर उसी रस्ते से गाँव की ओर जा रहा था. रस्ते में लगा पिंजड़ा में उसका पैर फंसा और भारी शरीर होने के कारण शेर पिंजड़े में बंद हो गया. अब वह उस पिंजड़े में बुरी तरह से फंस चूका था. काफी कोशिश करने के बावजूद भी वह वहाँ से नही निकल पाया. पूरी रत शेर पिंजड़े में ही कैद रहा. 

    सुबह हुई कुछ समय बाद एक पंडित उसी रास्ते से गाँव में पूजा कराने जा रहा था तभी शेर बोला - " ओ पंडित! ओ पंडित!"

    पंडित शेर को पिंजड़े में देखकर डर गया. शेर को काफी तेज़ की भूख लगी थी.

    शेर ने पंडित से कहा - " मेरी सहायता करो. मुझे बहुत तेज़ प्यास लगी है. कृपया कुछ पानी पिला दो."

    पंडित बोला - "नही! नही! मैं तुम्हारी सहायता नही कर सकता. तुम एक मांसाहारी जीव हो, अगर मुझे ही अपना शिकार बना लिए तो! "

    शेर बोला - "नही पंडित! मैं ऐसा नही करूंगा."

    शेर की लाचारी देखकर पंडित को शेर पर दया आ गयी और वह बगल के तालाब से पानी ले आया और शेर को पानी पिलाया. शेर पानी पी लिया उसके बाद फिर से पंडित को बोला - "पंडित प्यास तो बुझ गयी अब पूरी रात से भूखा हूँ कुछ खाने को दे दो न."

    पंडित शेर के भोजन की व्यवस्था में जुट गया और कहीं कहीं से उसका भोजन ले आया. शेर भोजन भी किया.

    शेर ने फिर से आवाज लगायी - " ओ पंडित!  मैं इस पिंजड़े में बुरी तरह से फंस चूका हूँ . कृपा करके इस पिंजड़े से मुझे आजाद करा दो."

    पंडित बोला - " नही! नही! मैं तुम्हारी और सहायता नही कर सकता. तुम एक मांसाहारी जीव हो. पिंजड़े के बाहर आते ही तुम अपना अस्तित्व में आ जाओगे."

    शेर बोला - "मैं तुम्हे कुछ नही करूंगा." तुम्हारे परिवार को भी कोई नुकसान नही पहुंचाऊंगा. "

    पंडित उसकी बात मान कर पिंजड़ा का दरवाजा खोल दिया और शेर बाहर आ गया. शेर बहार आते ही पहले चैन की साँस ली.

    और बोला मेरी अभी तक भूख मिटी नही है और भोजन भी सामने है सो भोजन तलाशने का भी जरुरत नही है. अब झट से तुझे अपना शिकार बना लेता हूँ.

    इतना सुन पंडित डर से काँपने लगा. और बोला - "तुम बेईमानी नही कर सकते. तुमने पहले ही बोला था की मैं तुम्हे नही खाऊंगा और तुम्हारे परिवार को भी नुकसान नही पहुंचाऊंगा, तो अब ऐसा क्यों कर रहे हो. "

    शेर बोला - मैं जीव ही उसी तरह का हूँ. मुझे बहुत जोर से भूख लगी है तो अब कुछ नही. संयोग से ये सब घटना पास के एक पेड़ पर बैठे बन्दर देख था. शेर और पंडित में बहस चल ही रहा था तभी बीच में से बन्दर बोल पड़ा - "क्या बात है पंडित! क्या बहस हो रही है ? पंडित सारी कहानी कहकर बन्दर को सुनाया. बन्दर बोला - अच्छा! तो ये बात है. वैसे पंडित मुझे एक बात समझ नही आई इतना बड़ा शेर इस छोटे से पिंजड़े में कैसे आ सकता है. नही! नही! ये हो ही नही सकता!" 

    शेर को अपनी बेइज्जती होते देख रहा नही गया और शेर बोला - "ये पंडित ठीक कह रहा है, मैं इस पिंजड़े में पूरी रात कैद था."

    बन्दर बोला - "मैं कैसे यकीन करूं."

    शेर बोला - "मैं अभी दिखा देता हूँ, इस पिंजड़े में फिर से जा कर." और इतना कह शेर फिर से उस पिंजड़े में चला जाता है और पिंजड़ा का दरवाजा बंद हो जाता है. और उसके बाद शेर बोला - "देखो मैं इसी तरह पिंजड़े में था."

    बन्दर बोला - "अब देख क्या रहे हो पंडित अपनी जान बचा कर भाग लो!" और पंडित वहाँ से भाग जाता है. शेर फिर से पिंजड़े में कैद हो जाता है.

तो दोस्तों! ये था एक छोटा सा कहानी शेर और पंडित की. जिससे हमे एक नयी शिक्षा मिलती है की कभी भी किसी की मदद करें तो सोच समझ कर करे. अगर हमारा ये लेख आपको पसंद आई तो शेयर करे और इस तरह की और कहानी पाने के लिए हमे जरुर कमेंट करे.

धन्यवाद्!

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