किसान आन्दोलन : सरकार कानून वापस लेंगी या किसानों की माँग पूरी करेंगी ...........
हेलो दोस्तों ! मेरा नाम पुजा कुमारी है और मेरा ब्लॉग AchchhiJankari4u पर आपका स्वागत है. आज का टॉपिक आपके सामने लेकर आई हूँ भारत बंद. किसानों ने अपनी माँग पूरी करने के लिए किसान आन्दोलन कर रहे हैं.
नई दिल्ली : नए कृषि कानूनों के विरोध में किसान संगठन की तरफ से मंगलवार को भारत बंद शांतिपूर्ण रहा और इसका कुछ असर भी देखने को मिला. किसान भाई अपने मांग पर अड़े रहे. इस विषय में 13 किसान नेताओं और गृह मंत्री अमित शाह के बीच मंगलवार को देर रात तक मुलाकात कायम रही और बातचीत बनी रही, लेकिन फिर भी कोई फायदा नही. किसानों को अभी तक इसके बारे में साफ - साफ कुछ कहा नही गया. किसान नेता अपनी माँग को लेकर कुछ सुनना नही चाह रहे, वहीँ दूसरी ओर सरकार ने भी अपनी फैसला साफ - साफ कह डाली की कानून को वापस नही लिया जायेगा. सरकार और किसानों के बीच पाँचवे दौर की बातचीत हो चुकी है, लेकिन अभी तक कोई मसला नही निकल पाया है.
सरकार किसान के हित में रखेगी प्रस्ताव
सरकार भी किसानों के हित के बारे में काफी गंभीरता से सोच - विचार कर रही है. मंत्रालयों में कई फ़ॉर्मूले पर चर्चा की जा रही है. सरकार किसान यूनियनों से कुछ समय की माँग की ताकि आगे की बातचीत के लिए ठोस प्रस्ताव की तैयारी की जा सके. हज़ारों की संख्या में किसान धरने पर हैं और अपनी माँग पर अड़े हैं. उनमे फुट डालने और उन्हें रोकने का भी प्रयत्न किया गया लेकिन सारी कोशिश नाकाम रही और किसानों में अभी भी एकता कायम है. किसानों का कहना है की अपनी माँग पूरी करवा के ही दम लेंगे. सरकार भी इनकी अडिगता देखकर इनके हित में प्रस्ताव रखने की बात कही.
शोषण से डर रहे किसान
किसानों अपनी माँग पूरी करने के साथ - साथ इस बात से भी डर रहे हैं की नै व्यवस्था में मंदी और एमएसपी प्रणाली ख़त्म कर दी गयी तो उनसे सरकार गेहूँ और चावल लेना बंद कर देगी और फिर किसानों को अपना माल प्राइवेट कंपनियों में बेचना पड़ेगा, जहाँ उनका शोषण किया जायेगा. लेकिन सरकार ने किसानों को यकीन दिलाई की ये प्रणाली चलती रहेगी. किसानों को शोषण की चिंता करने की बिलकुल भी जरुरत नही है. सरकार एमएसपी पर सबसे बड़ी खरीदार है. एमएसपी पर सरकारी खरीद की व्यवस्था किसानों के लिए बहुत महत्वपूर्ण प्रश्न है.
कौन क्या बोले
* राकेश टिकैत : भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय अध्यक्ष राकेश टिकैत ने कहा - "किसान वापस नही जायेगा. यह सम्मान का मामला है" टिकैत भी किसानों के साथ ही हैं.
* मंजीत सिंह - भारतीय किसान यूनियन के दाओबा के स्टेट प्रेसिडेंट मंजीत सिंह भी किसानों के हक में बोले - "भारत सरकार की तरफ से भेजे गए प्रस्ताव पर हम बैठक करने जा रहे हैं "
* एक बस चालक - तेलंगाना के कमरेड्डी में सड़क परिवहन निगम के कर्मचारी किसानों को समर्थन करते हुए कहा - "हम आरटीसी के कार्यकर्ता यहाँ विरोध कर रहे हैं, किसानों के साथ अन्याय नही होनी चाहिए".
* परिवहन मंत्री खाचरियावास ने भारत बंद का समर्थन करते हुए कहा : "केंद्र को समझना चाहिए की उनका जुल्म, तानाशाही ज्यादा नही चलेगी. किसान विरोधी कानून वापस लेने पड़ेंगे." तमाम विपक्षी पार्टियां इनके विरोध में है.
इसी तरह अन्य सभी भी भारत बंद का समर्थन करते हुए अपनी - अपनी राय दी और किसानों की मदद की.
किसानों की 15 सूत्रीय मांग क्या हैं
दिल्ली - यूपी बॉर्डर पर मंगलवार को हज़ारों किसान अपनी 15 सूत्रीय माँग के साथ धरने पर बैठे रहे. किसानों को समझाने के लिए और इस आन्दोलन को ख़त्म करवाने के लिए आए केन्द्रीय कृषि राज्यमंत्री गजेन्द्र शेखावत ने भी काफी आश्वासन दिए और उनकी ज्यादातर मांगे सरकार मान रही है ये दावा भी किया. फिर क्या! केन्द्रीय मंत्री के 15 मिनट भाषण के बावजूद भी किसान आन्दोलन ख़त्म नही कर रहे.
आइये जानते हैं कि किसानों की 15 सूत्रीय माँगे क्या - क्या हैं -
पहली माँग - किसानों की सभी फसलों का उचित मूल्य मिलना चाहिए.
गजेन्द्र शेखावत ने कहा - किसान को उसकी फसल का 50% फीसदी लाभकारी मूल्य मिलना चाहिए.
दूसरी माँग - देश के किसानों पर लगभग 80% कर्ज राष्ट्रीयकृत बैंकों का है. देश के किसानों के सभी तरह के कर्ज एक ही समय में बिना किसी समय सीमा के भारत सरकार के माध्यम से माफ किए जाए.
गजेन्द्र शेखावत ने कहा - सारे किसान प्रतिनिधियों से अध्यक्षता में बनाई गई समिति में चर्चा करूँगा और इसका रास्ता निकालने का प्रयत्न करेंगे. अगले तिन महीने में इसका निस्तारण करने की कोशिश करेंगे.
तीसरी माँग - अधिक डीजल वाहनों के सञ्चालन पर 10 वर्ष से लगाई गई रोक से किसानों के ट्रैक्टर, पम्पिंग सैट, कृषि कार्य में होने वाले डीजल इंजन को (एंटिक कारों के आधार पर) मुक्त किया जाए.
गजेन्द्र शेखावत ने कहा - केंद्र सरकार सुप्रीम कोर्ट जाएगी और किसानों के लिए लड़ाई लड़ेगी.
चौथी माँग - प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना से किसानों को लाभ मिलने के बजाय बीमा कंपनियों को लाभ मिल रहा है. योजना में बदलाव किया जाए.
गजेन्द्र शेखावत ने कहा - जो कम्पनियाँ किसानों को भुगतान में देरी करती है उनको 7 दिनों का समय दिया गया है अगर 7 दिन से एक दिन की भी देरी हुई तो किसान 12 फीसदी के हिसाब से ब्याज भी देंगी कम्पनियाँ.
पाँचवी माँग - किसानों की न्यूनतम आमदनी सुनिश्चित की जाए. लघु और सीमान्त किसानों को 60 वर्ष की आयु के बाद कम से कम 5000 रूपये मासिक पेंसन दी जाए.
गजेन्द्र शेखावत ने कुछ नही कहा.
छठी माँग - देश में आवारा पशुओं जैसे - सूअरों, निलघोड़ो आदि के द्वारा फासले पूरी तरह से नष्ट कर दी जाती है. इससे देश की खाद्य सुरक्षा व खेती दोनों खतरे में हैं. जंगली जानवरों से सुरक्षा प्रदान की जाए.
गजेन्द्र शेखावत ने कहा - इसको बीमा में कवर किया जाना चाहिए इसके लिए हमने पहले ही कानून बना दिए हैं.
सातवीं माँग - किसानों का बकाया गन्ना भुगतान ब्याज सहित अविलम्ब किया जाए. चीनी का न्यूनतम मूल्य 40 रूपये प्रति किलो तय किया जाए.
गजेन्द्र शेखावत ने कुछ नही कहा.
आठवीं माँग - किसानों को सिंचाई के लिए नलकूप की बिजली निःशुल्क उपलब्ध करायी जाए.
गजेन्द्र शेखावत ने कुछ नही कहा.
नौवीं माँग - पिछले 10 वर्षो में खेती में हो रहे नुकसान के कारण तीन लाख से अधिक किसानों ने आत्महत्या की है. यह खबर पुरे देश के लिए शर्मनाक है. ऐसा होना आज भी जारी है. आत्महत्या करने वाले किसानों के परिवारों को पुनर्वास करते हुए परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी दी जाए.
गजेन्द्र शेखावत ने कुछ नही कहा.
दसवीं माँग - मनरेगा को खेती से लिंक किया जाए.
गजेन्द्र शेखावत ने कहा - इस पर कानून बन रही है.
ग्यारहवी माँग - खेती में काम आने वाली सभी वस्तुओ को GST से मुक्त किया जाये.
गजेन्द्र शेखावत ने कहा - अगली GST काउन्सिल में ये बात रखवायेंगे और किसानों के हित में जो होगा उसको करवाने की कोशिश करेंगे.
बारहवीं माँग - कृषि को विश्व व्यापार संगठन से बाहर रखा जाये. मुक्त व्यापार समझौतों में कृषि पर चर्चा न की जाए.
गजेन्द्र शेखावत ने कुछ नही कहा.
तेरहवीं माँग - देश में पर्याप्त मात्रा में पैदावार वाली फसलों का आयात बंद किया जाये.
गजेन्द्र शेखावत ने कहा - भारत में जो भी चीज पर्याप्त पैदा होती है उसका आयात किसी भी हाल में नही होने देना है.
चौदहवीं माँग - देश में सभी मामलों में भूमि अधिग्रहण एवं पुनर्वास अधिनियम 2013 से ही किया जाए. भूमि अधिग्रहण को केन्द्रीय सूची में रखते हुए राज्यों को किसान विरोध कानून बनाने से रोका जाए.
गजेन्द्र शेखावत ने कुछ नही कहा.
इस तरह किसानों की माँग और सरकार के बीच आन्दोलन चल रहे हैं.
धन्यवाद!


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