महात्मा गाँधी के 37 अनमोल विचार
1. जो कला आत्मा को आत्मदर्शन करने की शिक्षा न दे, वह कला नहीं है.
2. आहार मानव-जीवन की दैनिक आवश्यकता है, पर उसपर नियंत्रण अनिवार्य है.
3. आहार संतुलित और विवेकपूर्ण हो, तो शारीर में कोई रोग हो ही नही सकता.
4. आशा अमर है, उसकी आराधना कभी निष्फल नही होती.
5. सच्चा अर्थशास्त्र तो न्यायबुधि पर आधारित अर्थशास्त्र है.
6. जहाँ दया नही, वहाँ अहिंसा नही. जिसमे जितनी दया है, उतनी ही अहिंसा है.
7. राष्ट्रभाषा की जगह एक हिंदी ही ले सकती है, कोई दूसरी भाषा नही.
8. विश्वास करना एक गुण है, अविश्वास दुर्बलता की जननी है.
9. शिक्षा का उद्देश्य है विद्यार्थी को मनुष्य बनाना.
10. शिक्षा के बिना मानव-मष्तिस्क का विकास हो ही नही सकता.
11. अधिक से अधिक कर्मशील मनुष्य ज्यादा से ज्यादा संयमी होगा.
12. अगर हमारे जीवन में सच्चाई है, तो उसका असर अपने आप लोगो पर पड़ेगा.
13. अगर मनुष्य सीखना चाहे, तो उसकी हर भूल उसे कुछ शिक्षा दे सकती है.
14. वास्तविक सौन्दर्य ह्रदय की पवित्रता में है.
15. त्याग के लिए त्याग करना मुश्किल होता है, परन्तु सेवा के लिए निमित्त आसान हो जाता है.
16. स्वावलंबन सफलता की पहली सीधी है.
17. स्वास्थ्य अच्छा रखने के लिए ब्रह्मचर्य का पालन बहुत जरुरी है.
18. राष्ट्रीय व्यवहार में हिंदी को काम में लाना देश की उन्नति के लिए आवश्यक है.
19. चरित्र की रक्षा किसी भी मूल पर होनी चाहिए.
20. कार्य में व्यक्तिगत परिश्रम की रक्षा और मानवीय ईमानदारी होनी चाहिए, लोभ नही.
21. जब तक गलती करने की स्वतंत्रता न हो, तब तक स्वतंत्रता का कोई अर्थ नही है.
22. जीने के लिए तो एक पल ही काफी है, बशर्ते आपने उसे कैसे जिया.
23. चरित्र की संपत्ति दुनिया की तमाम दौलतों से बढ़कर है.
24. यदि चरित्र निर्माण न हुआ, तो सारे रचनात्मक कार्यक्रम व्यर्थ हैं.
25. गुरु के बिना किसी भी क्षेत्र का समुचित ज्ञान प्राप्त करना कठिन होता है.
26. जिसमे शुद्ध श्रद्धा है, उसकी बुद्धि तेजस्वी रहती है.
27. हम बड़ी बड़ी को न सोचें, अच्छी बातों को सोचें.
28. उन्नति का मूल आत्मसमर्पण है, उन्नति का अर्थ है आत्मज्ञान.
29. किसी भी राष्ट्र का परिचय उसके अनुशासनबद्ध नागरिकों से मिल जाता है.
30. पुरुषार्थ परिस्थितियों को अपने अनुकूल बनाने में है.
31. काम, काम और काम ही हमारा जीवन-सूत्र होना चाहिए.
32. विचारों का अजीर्ण भोजन के अजीर्ण से कहीं बुरा है.
33. राष्ट्रभाषा के बिना राष्ट्र गूंगा है.
34. हिंदी भाषा के लिए मेरा प्रेम सब हिंदी प्रेमी जानते हैं.
35. हिंदी अपनी भूमि की अधिष्ठात्री है.
36. संसार में बुद्धि-बल बहुत बड़ा है.
37. बुद्धि का दुरूपयोग हुआ तो वह संसार में बड़े से बड़ा अनर्थ करने का कारण बन जाता है.


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